अल्लाह करम करना, मौला तू रहम करना

Wynk music पर यह गाना ‘हम सबको नेक राह चलाना मेरे अल्लाह’ के नाम से मौजूद है. Source:YouTube and photo credit Hindigeetmala.net

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YouTube पर यह गाना अल्लाह करम करना, मौला तू रहम करना के नाम से मौजूद है

आजकल उर्दू का उपयोग नहीं करने और मुसलमानों की दुकानों से सामान नहीं ख़रीदने का फ़रमान (फ़तवा) निकाल रखा है कुछ कट्टर हिंदू संगठनों ने।

मेरे जीवन में इस गाने के कारण, कक्षा 8 या 9 में, मुझे पूरी क़ुरान और मुस्लिम क़ौम के मूल्यों के बारे में जो सीख मिली उसे मैंने हिंदू होते हुए अपने जीवन में उतारा और उनको सही पाया भी।

अब आजकल के युवकों को यदि यह सब नहीं मिल पाएगा तो आनेवाले कल के ‘भारतीय युवा’ में वह चमक और हुनर निश्चित ही नहीं मिलेगा जिसके लिए आज हम जाने जाते हैं। क्योंकि इन कट्टरपंथियों ने निश्चित ही इसका आकलन ही नहीं किया है कि मुस्लिम संस्कृति कैसे कैसे और किस किस तरह से हमारे युवकों में बहुमूल्य योगदान भी देती है। और उसकी जगह पर ये जो ‘संस्कृति’ का विकास करने की बात करते हैं, यदि वह सही और ईमान के काबिल होते तो उनको ज़ोर ज़बर्दस्ती करके लोगों पर थोपना नहीं पड़ता। विदेशों से लोग उनको सीखने यहाँ आ रहे होते, जैसे ओशो से सीखने आते थे।

नोटबंदी के दौरान हम इसी तरह का नजारा देख चुके हैं जब बग़ैर उसके कारण लोगों को होने वाली परेशानियों का आकलन किए उसे लागू किया गया, जो बाद में हमें पता चली।

गाने के अच्छे बोल, अच्छी पिक्चर्स का हमारे जीवन पर बहुत असर होता है। गौहर कानपुरी ने जैसे इस गीत को मेरे लिए ही लिखा था। आज उनका wiki पर कहीं नामो-निशान तक नहीं है। उर्दू के संरक्षण पर काम करने वाली संस्था रेख़्ता से गुज़ारिश है कि इस पर ध्यान देकर उन्हें सही सम्मान दिलाया जाए। उन्होंने 189 गाने लिखे और एक भी गाने/फ़िल्म में उनको श्रेय wiki पर नहीं दिया गया है।

हम सबको नेक राह चलाना मेरे अल्लाह
बन्दों को बुराई से बचाना मेरे अल्लाह


अल्लाह करम करना, मौला तू रहम करना
अल्लाह करम करना, मौला तू रहम करना

एक वाकया सुनाती हूँ मैं अपनी ज़ुबानी
अपने बड़ों से मैंने सुनी है ये कहानी


रहता था किसी शहर में एक ऐसा भी इंसान
जो नाम का मुस्लिम था मगर काम का शैतान

ज़ालिम को ज़ोर ए बाज़ू पे अपने गुरुर था
यानि के बेख़ुदी में खुदा से वो दूर था


सब लोग उसे कहते थे जल्लाद सितमगर
मासूम की फ़रियाद का उस पे न था असर


जो वादा उस ने कर लिया वो कर के दिखाया
पैसों के लिए क़त्ल किये खून बहाया


इक दिन वो बहता खून असर उस पे कर गया
इंसान ज़िंदा हो गया शैतान मर गया


अल्लाह करम करना मौला तू रहम करना
अल्लाह करम करना मौला तू रहम करना

अमजद खान: आपा क्या मैं एक सवाल कर सकता हूँ?
लड़की: बापू? तुम आ गये बापू?
आपा: बापू?
अमजद खान : मुन्नी देख मैं तेरे लिए गुड़िया लाया हूँ.
मुन्नी: बापू, करिमन आपा बड़ी अच्छी बातें सुनती है. झूठ नहीं बोलना चाहिए, बुरे काम नहीं करने चाहिए, ईमान के रास्ते पर चलना चाहिए।
अमजद: ईमान? ईमान क्या होता है आपा?

ईमान जिसे कहते हैं फरमान ए खुदा है
कुरान के हर लफ्ज़ में उस की ही सदा है


अल्लाह ने बख्शी है जो ईमान की दौलत
इन सब से बड़ी चीज़ है इंसान की दौलत


सोए हुए दिलों को जगाता है ये ईमान
भटके हुओं को राह दिखाता है ये ईमान


ईमान की गर्मी से पिघल जाते हैं पत्थर
इस नूर से बनते हैं संवरते हैं मुक़द्दर


जो सब से प्यार करता है इंसान वही है

मुस्लिम है वो ही साहिब ए ईमान वही है


अल्लाह करम करना, मौला तू रहम करना
अल्लाह करम करना, मौला तू रहम करना

अमजद खान: अगर किसी ने बुरा काम करने का वादा कर लिया हो और वह उस काम को न करे तो क्या वह बेईमान कहलाएगा?

जिस काम के करने पे न हो राज़ी कोई दिल
वो काम भी इस दुनिया में नफरत के ही काबिल

(मेरे पोस्ट सहज जीवन के सूत्र में मैंने जो बताया है उसमें ओशो ने भी यही कहा है)

जो कुछ भी जुबां कह दे वो इक़रार नहीं है
लरज़िश है लबों की वो गुनहगार नहीं है

जो दिल से नहीं करता बुराई का इरादा
अल्लाह से वो तौबा करे तोड़ दे वादा


जल्दी जो संभल जाए वो नादान नहीं है
ईमान जिस में हो वो बेईमान नहीं है


दुनिया में हमेशा तो नहीं रहता अन्धेरा
इंसान जहां जागे वहीँ पे है सवेरा


अल्लाह करम करना मौला तू रहम करना
अल्लाह करम करना मौला तू रहम करना

अमजद खान: आपा, एक गुनहगार अल्लाह की नज़रों में सूर्खरूह कैसे हो सकता है?

जो सच्चे दिल से करता है ईमान की आरज़ू
अल्लाह की नज़रों में वो होता है सुर्ख रूह


ईमान में क्या क्या न सहा प्यारे नबी ने
क्या ऐसी मुसीबत भी उठायी है किसी ने?


कर्बला के शहीदों ने सबक हम को पढ़ाया
सजदे में दे के जान को ईमान बचाया

(सत्य की रक्षा के लिए देवी अहिल्या ने अपने एकमात्र बेटे को मौत की सजा सुनाई। सत्य मतलब लोगों को एक करके रखना. आजकल कुछ भटके हुए लोग सत्य की क़ीमत पर याने लोगों में भेदभाव बढ़ाकर हिंदू धर्म को बचाने की कोशिश कर रहे हैं जो निश्चित ही सफल नहीं होगी और होगी भी तो स्थायी नहीं होगी इसलिए मेरी राय यही है कि सभी तरह के भेदभाव का रास्ता छोड़कर हमको सत्य की राह, सत्य के लिए क़ुर्बानी की राह पर चलना चाहिए।)


इस राह में जो सहते हैं तक़लीफ़ ओ मुसिबत
इक रोज़ उन पे होती है अल्लाह की रहमत


इंसान है वो जो दूसरों का दिल न दुखाए
पड़ जाए अगर जान पे तो जान लुटाएं


अल्लाह करम करना, मौला तू रहम करना
अल्लाह करम करना, मौला तू रहम करना.

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