पाँव पानी में पड़े पर गीले ना हुए, भोगा लेकिन आसक्ति नहीं हुई। आग से निकला किंतु जला नहीं, प्रेम में धोखा खाया लेकिन वही प्रेम ईश्वर की खोज बन गया।- मेरी यात्रा सार

“संन्यास व्यक्तिगत क्रांति है। भक्ति मार्ग का संन्यासी भोग से विमुख नहीं होता, परमात्मा का ही भोग शुरू करता है। जिन मित्र ने पूछा है, उन्हें हिंदू, शंकराचार्य, जैन, महावीर, गौतम सिद्धार्थ, बुद्ध--इनकी परंपरा के संन्यासियों का बोध है। और ऐसा हुआ है कि इनकी परंपरा इतनी प्रभावी हो गयी कि धीरे-धीरे ऐसा लगने लगा … Continue reading पाँव पानी में पड़े पर गीले ना हुए, भोगा लेकिन आसक्ति नहीं हुई। आग से निकला किंतु जला नहीं, प्रेम में धोखा खाया लेकिन वही प्रेम ईश्वर की खोज बन गया।- मेरी यात्रा सार

लोग टाइम टेबल ही पढ़ते रहते हैं

ब्रेकेट में मैंने अपने अनुभव के आधार पर उस हिस्से पर और प्रकाश डालने का प्रयत्न किया है ताकि आप ओशो के उँगली के इशारे की तरफ़ नज़र डालें ना कि उँगली की पूजा करने लगें। "लोग बहाने खोजते हैं--न मालूम कितने-कितने! पति कहता है कि पत्नी रोकती है। कौन किसको रोक सका है: कौन … Continue reading लोग टाइम टेबल ही पढ़ते रहते हैं

State of Journalism in India but with a ray of hope

Akash Banerjee recently posted two posts on his Instagram account to inform people about state of television journalism in India. In one incident on R television channel hosted by Arnab Goswami, an Oxford Alumni, about talks on ‘Who is allowing war to go on’ and he was schooled by a penalist. In another incident the … Continue reading State of Journalism in India but with a ray of hope