What does it mean by ‘Chop wood, carry water’?

I tried to explain the difference between same routine followed by a mystic before and after awakening. Meditativeness or mindfulness in performing one’s duty/responsibility towards near ones and society leads to such transformation. Call it consciousness or REALITY or God or Love or Emptiness or Tao but the experience is same.

ताओ पुरुष की तरह aggressive नहीं है, स्त्री की तरह receptive है.

मातृशक्ति की तरह वह संसार को आपने गर्भ में सम्भाले हुए है और संसार उसके गर्भ में धीरे धीरे बढ़ रहा है। उसी से ऊर्जा ग्रहण करके संसार विकसित हो रहा है। हमारे द्वारा किया गया कोई भी कर्म इसीलिए कोई मायने नहीं रखता है। हम इस संसार रूपी गर्भस्थ शिशु के शरीर में कोई … Continue reading ताओ पुरुष की तरह aggressive नहीं है, स्त्री की तरह receptive है.

अंतिम पायदान से शून्य में छलाँग

क़रीब पिछले पंद्रह दिनों में मेरे अनुभवों को में कबीर के इस दोहे के समान अनुभव करता हूँ। कबीर मन निश्चल भया, और दुर्बल भया शरीर। तब पीछे लागा हरी फिरे, क़हत कबीर कबीर।।

मैं तुम्हें रोज़ रोज़ समझाऊँगा

शिष्य एक मिट्टी का लोंदा हो सके, तो ही गुरु उसे ईश्वर में ढाल सकता है। मैं तुम्हें रोज़ रोज़ समझाऊँगा ओशो का यह यूटूब पर ऑडीओ सुनने लायक़ है। जब तक आप स्वयं के प्रयत्न और अनुभव से आत्मज्ञान को प्राप्त नहीं हो जाते तब तक आप आध्यात्मिक ज्ञान की किताबों वेदों, उपनिषदों, बुद्ध, … Continue reading मैं तुम्हें रोज़ रोज़ समझाऊँगा

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Truth works in a miraculous way! Truth mutates to prevail. सत्यमेव जयते.

This post evolved out of an answer I have posted in comment section of a post on FaceBook page. I tried to explain my point in short but the overflow from within made it too long and it is now converted into a post here. Anyone trying to explain ‘truth’ will find difficulty in explaining it due to its very nature. But this new idea to point towards one of the eternal quality may give you a glimpse about it to most of the people.