होंश – updated

हिंदी में यह पोस्ट मेरे जीवन की छोटी शुरुआत के आत्मज्ञान प्राप्ति की साधना में अपने आप बदल जाने के बारे में है। This post is in Hindi about awareness meditation as advices by Buddha and Mahavir. Osho here describe in detail about how to imbibe it in our life so that naturally it starts flowing through us.

मेरी उठावना पत्रिका – ज्यों की त्यों धर दिनी चादरिया

इस पोस्ट को लिखने में मुझे क़रीब एक महीना से ज़्यादा की साधना करनी पड़ी। क्योंकि मेरा अनुभव नहीं बने तो मैं नहीं लिखूँगा यह पहली condition है। बहुत महत्वपूर्ण पड़ाव होता है यह आध्यात्मिक यात्रा का। अपने हाथों अपनी मौत की घोषणा करने जैसा है। मैं कहा करता था दोस्तों की कि मैं अपने उठवाने की पत्रिका खुद छपवाकर सबको पहले ही दे जाऊँगा। और और दोस्तों से मिलते ही मैं उनको भी पूछता था ‘क्यों ज़िंदा हो अभी तक, मरे नहीं? तुम्हारी भी पत्रिका छपवा ली है मैंने तो। मेरे साथ कौन जाएगा फिर?’

आज का विचार

संतो की कठिनाई है कि जो पाया है वह इतना अनोखा है कि सबको इसे पाना ही चाहिए और वे सब कहीं और ही व्यस्त हैं। और मनुष्य का भ्रम दोनों के बीच भी मायाजाल को काटने उपाय हो जाता है।

अंधेरी रात, तूफ़ाने तलातुम, नाख़ुदा गाफ़िल।

संसार की नाव में यात्रा तो सुरक्षित है क्योंकि नाव इस किनारे से बंधी है। लेकिन ज़्यादा से ज़्यादा नदी की बीच धार तक ही जा सकती है। और वहाँ यदि यह तूफ़ान में फँसे तो यह रस्सी जो सुरक्षा देती थी यही मौत का कारण बन जाती है। इसी को नाख़ुदा गाफ़िल कहा है। फ़र्क़ सिर्फ़ इतना है कि मैंने मँझधार में जाकर किश्ती को छोड़ दिया और अपने ऊपर भरोसा रखा कि यदि हम ग़लत कदम नहीं उठाएँ तो हमको कोई सही जगह पहुँचने से नहीं रोक सकता।

What Juniority and Seniority taught me in my polytechnic days?

I tried to my way of applying what I have been taught in life. You may taarch anything to anyone, but being a human how one is going to apply it in his life depends upon him. So even a small meditation taught may lead one to enlightenment, while full time training for 20 years may not bring a single change in another.