घणा दिन सो लियो रे, अब तो जाग मुसाफ़िर जाग।

इस देश के आध्यात्मिक यात्रा पर किए अनुसंधान इतने गहरे गए हैं कि कहीं और इस जगत में उसकी बराबरी नहीं है। सत्य हमेशा नएनए रूप में जगत के सामने आता रहेगा यह उसका स्वभाव है। यदि जिनके ऊपर इसके अनुसंधान की ज़िम्मेदारी है वे जब जब भी अपनीज़िम्मेदारी से च्युत होंगे, सत्य अपने को प्रकट कहीं और से करने लगेगा।

जो कर्ता में अकर्ता, और अकर्ता में कर्ता को देखता है। वही देखता है।

जो कर्ता में अकर्ता, और अकर्ता में कर्ता को देखता है। वही देखता है। गीता के एक श्लोक पर आधारित है यह. बचपन में अंधे और लंगड़े की पढ़ी कहानी को इसके माध्यम से आध्यात्मिक यात्रा के लिए उपयोगी बताने का प्रयास किया है ।