ऐसी भक्ति करे रैदासा।

रैदास की शिष्या, मीरा, के कृष्ण से मिलन की यात्रा को आज के परिदृश्य में बताने का प्रयत्न किया है। वह परमात्मा हमारा स्वरूप ही है, लेकिन यात्रा की भारी भरकम क़ीमत जो चुकाने को तैयार है उसे ही मिलता है। नाथद्वारा मैं आज भी मीरा का मंदिर है जो इस घटना का प्रमाण है। इसलिए उसे तोड़ा नहीं गया, पूरे मंदिर का पुनर्निर्माण कर दिया गया। वही उस मंदिर का केंद्र है।

हर शरीर में रामायण या महाभारत घट रही है प्रतिक्षण।

महाभारत मेरी नज़र से। मानव शरीर को मैंने पाँच पांडवों और कौरवों के घटनाक्रम का स्टेज पर नाटक के रूपांतरण के रूप में प्रस्तुत किया है। आध्यात्मिक दृष्टि से इस महाकाव्य की रचना क्यों की गयी होगी यह बताने का प्रयास किया है