पाँव पानी में पड़े पर गीले ना हुए, भोगा लेकिन आसक्ति नहीं हुई। आग से निकला किंतु जला नहीं, प्रेम में धोखा खाया लेकिन वही प्रेम ईश्वर की खोज बन गया।- मेरी यात्रा सार

“संन्यास व्यक्तिगत क्रांति है। भक्ति मार्ग का संन्यासी भोग से विमुख नहीं होता, परमात्मा का ही भोग शुरू करता है। जिन मित्र ने पूछा है, उन्हें हिंदू, शंकराचार्य, जैन, महावीर, गौतम सिद्धार्थ, बुद्ध--इनकी परंपरा के संन्यासियों का बोध है। और ऐसा हुआ है कि इनकी परंपरा इतनी प्रभावी हो गयी कि धीरे-धीरे ऐसा लगने लगा … Continue reading पाँव पानी में पड़े पर गीले ना हुए, भोगा लेकिन आसक्ति नहीं हुई। आग से निकला किंतु जला नहीं, प्रेम में धोखा खाया लेकिन वही प्रेम ईश्वर की खोज बन गया।- मेरी यात्रा सार