What does it mean by ‘Chop wood, carry water’?

I tried to explain the difference between same routine followed by a mystic before and after awakening. Meditativeness or mindfulness in performing one’s duty/responsibility towards near ones and society leads to such transformation. Call it consciousness or REALITY or God or Love or Emptiness or Tao but the experience is same.

Synchronicity

Synchronicity is first step towards enlightenment. It is tried to explain that it happens on its own. It is called as Wu-Wei-Wu by Lao Tzu. There are basically four steps but the first is experienced but recognised later. So there are only two recognisable steps of experience during which it is happening. However it is absurd to say but actually there is no one who recognises but in word it can be expressed like this only. The experience is such cannot be expressed in words.

There is no other ie REALITY is same for all.

a human being if one is just living in heard mentality by regurgitating what religion, society, education taught as one’s own knowledge about ‘self’ then that person cannot be hold in God’s arms. Only the one who dares to explore inner REALITY from one’s own experience could be.

पूरब के देशों में जन्मना या रहना क्यों होता है?

मैंने आध्यात्मिक यात्रा के लिए अपने दोस्तों साथियों और परिवार के लोगों से दूरियाँ बना लीं थीं। सिर्फ़ माता पिता और बच्चों की ज़िम्मेदारीयों को पूरे जिम्मेदारीपूर्ण तरीक़े से निर्वाह करता रहा। मैं आजकल अपने मित्रों तक यह संदेश पहुँचा रहा हूँ कि मैंने आध्यात्मिक यात्रा में एक छोटा सा मुक़ाम हासिल किया है, ताकि उनको उनके मेरी यात्रा में सहयोग का जो भी पुण्य मिला है उसका वे सही निवेश कर सकें।

घणा दिन सो लियो रे, अब तो जाग मुसाफ़िर जाग।

इस देश के आध्यात्मिक यात्रा पर किए अनुसंधान इतने गहरे गए हैं कि कहीं और इस जगत में उसकी बराबरी नहीं है। सत्य हमेशा नएनए रूप में जगत के सामने आता रहेगा यह उसका स्वभाव है। यदि जिनके ऊपर इसके अनुसंधान की ज़िम्मेदारी है वे जब जब भी अपनीज़िम्मेदारी से च्युत होंगे, सत्य अपने को प्रकट कहीं और से करने लगेगा।

It is spring after all!

You are the seed from which the tree of your ‘self’ is ready to evolve as soon as the seed is ready to sacrifice its outer cover (here the ego and desires are the outer cover of that seed) and then dare to jump into the unknown ie darkness (rooting in soil) and keep learning, unlearning and relearning by practicing meditation ie growth of roots. Then it is sure that one day the first glimpse of light becomes visible to its stem.

जो कर्ता में अकर्ता, और अकर्ता में कर्ता को देखता है। वही देखता है।

जो कर्ता में अकर्ता, और अकर्ता में कर्ता को देखता है। वही देखता है। गीता के एक श्लोक पर आधारित है यह. बचपन में अंधे और लंगड़े की पढ़ी कहानी को इसके माध्यम से आध्यात्मिक यात्रा के लिए उपयोगी बताने का प्रयास किया है ।

द्रोपदि का आधुनिक चीरहरण

पुराने जमाने में स्त्री को ज्ञान प्राप्ति नहीं हो सकती थी, लेकिन मीरा, राबिया, दयाबाई इत्यादि ने साबित कर दिया कि जीसस के ज्ञानप्राप्ति के बाद से धर्म की यात्रा में अब समाज का निम्न वर्ग और स्त्री दोनों ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं, और कई कर भी चुके।

ऐसी भक्ति करे रैदासा।

रैदास की शिष्या, मीरा, के कृष्ण से मिलन की यात्रा को आज के परिदृश्य में बताने का प्रयत्न किया है। वह परमात्मा हमारा स्वरूप ही है, लेकिन यात्रा की भारी भरकम क़ीमत जो चुकाने को तैयार है उसे ही मिलता है। नाथद्वारा मैं आज भी मीरा का मंदिर है जो इस घटना का प्रमाण है। इसलिए उसे तोड़ा नहीं गया, पूरे मंदिर का पुनर्निर्माण कर दिया गया। वही उस मंदिर का केंद्र है।

हर शरीर में रामायण या महाभारत घट रही है प्रतिक्षण।

महाभारत मेरी नज़र से। मानव शरीर को मैंने पाँच पांडवों और कौरवों के घटनाक्रम का स्टेज पर नाटक के रूपांतरण के रूप में प्रस्तुत किया है। आध्यात्मिक दृष्टि से इस महाकाव्य की रचना क्यों की गयी होगी यह बताने का प्रयास किया है